महात्मा गांधी के बारे में | Question on mahatma gandhi | Kisan andolan | Ancient history important question and answer| One liner gk question

 राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बारे में जानें-

Fact about Mahatma Gandhi : Question on mahatma gandhi



 
1- महात्मा गांधी जी का जन्म दिवस किस दिन को मनाया जाता है- 2 अक्टूबर
 
2- महात्मा गांधी जी का पूरा नाम क्या है- मोहन दास करमचंद गांधी
 
3- साबरमती आश्रम की स्थापना महात्मा गांधी जी ने कहाँ की थी- अहमदाबाद  1917 में 
 
4- महात्मा गांधी जी अपना राजनीतिक गुरू किसको मानते थे- गोपाल कृष्ण गोखले जी को
 
5- महात्मा गांधी जी जी दक्षिण अफ्रीका से कब लौटे थे- 1915 मे
 
6- महात्मा गांधी जी का भारत में सर्वप्रथम आंदोलन कौन सा था- चम्पारण आन्दोलन
 
7- महात्मा गांधी जी को महात्मा की उपाधि किसने दी थी- रवीद्रनाथ टैगोर
 
8- असहयोग आन्दोलन शुरूआत  1920-21 में  किसने किया था- महात्मा गांधी जी ने
 
9- महात्मा गांधी जी कब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे- 1924 में
 
10- किस आन्दोलन के समय महात्मा गांधी जी ने कहा कि यह मेरे जीवन का यह अंतिम संघर्ष होगा और आंदोलनकारियों को करो या मरो का नारा दिया- भारत छोड़ो आन्दोलन
 
11- 1915 ई० में महात्मा गांधीजी को ब्रिट्रिश सरकार ने किस उपाधि से सम्मानित किया था- कैसर हिन्द
 
12- महात्मा गांधीजी का डांडी मार्च किस आन्दोलन से संबंधित था- नमक सत्याग्रह आन्दोलन
 
13- महात्मा गांधी जी को अर्धनग्न फकीर किसने कहा था- चर्चिल ने
 
14- प्रथम विश्व युद्ध के दौरान महात्मा गांधी जी को क्या कहा गया था- रिक्रूटिंग सार्जेन्ट
 
15- महात्मा गांधी जी को सर्वप्रथम किसने राष्ट्रपिता कहकर सम्बोधित किया था- सुभाष

 quiz on mahatma gandhi


16- महात्मा गांधी जी ने सत्याग्रह के हथियार का सबसे पहले प्रयोग कहाँ किया था- दक्षिण अफ्रीका में
 
17- महात्मा गांधी जी ने भारत में षसत्याग्रह सबसे पहले कहाँ किया था- चम्पारण में
 
18- महात्मा गांधी जी के सत्याग्रह का प्रमुख अस्त्र क्या है- अहिंसा परमो धमः
 
19- महात्मा गांधी जी ने सर्वप्रथम किस आन्दोलन के दौरान भूख हड़ताल को अपना अस्त्र बनाया- अहमदाबाद आन्दोलन
 
20- भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित होने के बाद महात्मा गांधी जी को कैद करके कहाँ रखा गया था- आगा खाँ पैलेस  पुणे  में
 
21- महात्मा गांधीजी ने अखिल भारतीय हरिजन संघ की स्थापना कब की थी- 1932 में
 
22- यंग इंडिया  पत्र  हरिजन  पत्र  के सम्पादक एवं शुरू करने वाले कौन थे- महात्मा गांधी जी
 
23- हिन्दू स्वराज   माई एक्सपेरीमेन्टस विद ट्रुथ पुस्तक के लेखक कौन थे- महात्मा गांधी जी
 
24- महात्मा गांधी जी के समाधि स्थल नई दिल्ली में राजघाट पर स्थितए उनके दो शब्द क्या उत्वमत हैं- हे राम
 
25- सत्य और अहिंसा यही मेरा ईश्वर है किसके अनमोल वचन हैं- गांधी जी के
 
 मुहम्मद गौरी का इतिहास (1173.1206 .)

History of Mohd. Gauri : Question on mohammad Gauri
 

 1. मुहम्मद बिन कासिम के बाद महमूद गजनवी और उसके बाद मुहम्मद गौरी ने भारत पर आक्रमण किया तथा कत्लेआम कर लूटपाट मचाई

2. भारत में तुर्क साम्राज्य का श्रेय मुहम्मद गौरी को ही दिया जाता है।
 मुहम्मद गौरी गजनी और हेरात के मध्य स्थित एक छोटे से पहाङी क्षेत्र का गजनी का शासक था।
 
 3. 12 वी शता. के मध्य में गोरी वंश का उदय हुआ।गोर वंश की नींव अला.उद.दीन जहांसोज ने रखी थी। जहांसोज की मृत्यु के बाद उसके पुत्र सैफ.उद.दीन गोरी के सिंहासन पर बैठा।
 
 4. गोरी साम्राज्य का ज्यादादर आधार उत्तर -पश्चिम अफगानिस्तान था। प्रारंभ में गोरी गजनी के अधीन था।
 
 5. मुहम्मद गौरी जो है वो शंसबनी वंश का था। मुहम्मद गौरी का पूरा नाम शिहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी था। ग्यासुद्दीन मुहम्मद गौरी इसका बङा भाई था। इसके साथ साथ ग्यासुद्दीन मुहम्मद गौरी ने 1163 .में गोर को राजधानी बनाकर स्वतंत्र राज्य को भी स्थापित करा।
 
 6. 1173 . में ग्यासुद्दीन ने अपने छोटे भाई मुहम्मद गौरी को गोर का पूरा क्षेत्र सौंप दिया तथा स्वयं गजनी पर अधिकार कर ख्वारिज्म के विरुद्ध संघर्ष शुरु कर दिया।
 
 7. मुहम्मद गौरी ने भारत देश  की ओर प्रस्थान कर दिया। महम्मद गौरी एक अफगान सेनापति था। यह एक महान विजेता और सैन्य संचालक भी था।
 
 8. मुहम्मद गौरी के आक्रमण. कौन कौन से थे -
 
 9. मुहम्मद गौरी के आक्रमण का पूरा उद्देश्य महमूद गजनवी के आक्रमणों से अलग था।
 
 10. यह भारत देश में लूटपाट के साथ.साथ इस्लाम धर्म  साम्राज्य के विस्तार का भी इच्छुक था। इसीलिए भारत में तुर्क साम्राज्य का संस्थापक मुहम्मद गौरी को ही माना जाता है।
 
 11. गौरी ने पहला आक्रमण 1175 . में  मुल्तान पर किया था और वहां के राज दाहिर थे इस समय यहाँ पर शिया मत को मानने वाले करामाती शासन कर रहे थे। ये करामाती मुस्लिम बनने से पहले बौद्ध थे। गौरी ने मुल्तान को जीत लिया था।
 

 12. गौरी ने 1178 . में दूसरा आक्रमण गुजरात पर किया था लेकिन मूलराज द्वितीय ने उसे आबू पर्वत की तलहटी में पराजित कर दिया था भारत देश  में मुहम्मद गौरी की यह पहली पराजय थी। इस युद्ध का संचालन नायिका देवी ने किया था !

 13. इस युद्ध से सबक लेते हुए गौरी ने पहले संपूर्ण पंजाब पर अपना अधिकार कर भारत देश पर अधिकार करने के लिये प्रयास शुरु किये।
 
14.  1179-86 . के बीच उसने पंजाब को जीत लिया था।
 
 15. 1179 में स्यालकोट पर भी अधिकार कर लिया
 
 16. 1186 . तक गौरी ने लाहौर श्यालकोट और भटिण्डा (तबरहिंद) को जीत लिया था।तबरहिंद पर पृथ्वीराज चौहान तृतीय का पूरा अधिकार था। तबरहिंद पृथ्वीराज चौहान का सीमावर्ती क्षेत्र था। गौरी ने इस पर अधिकार किया था जिसकी वजह से गौरी चौहान के बीच युद्ध होना अवश्यंभावी हो गया था।
 
 तराइन का प्रथम युद्ध -
Tarain first War : Tarain ka pehla yudh

 1. 1191 . में तराइन के प्रथम युद्ध में पृथ्वीराज तृतीय ने मुहम्मद गौरी को हरा दिया था  लेकिन उसकी शक्ति को समाप्त नहीं कर सका।
 
 तराइन का द्वितीय युद्ध.
Tarain Second War : Tarain ka dusra yudh
 
 1. 1192 . में गौरी ने पृथ्वीराज तृतीय को हराकर अजमेर और दिल्ली तक के क्षेत्रों को पूरा जीत लिया तथा इसी के साथ चौहान साम्राज्य का नाश हुआ। तराइन के द्वितीय युद्ध में पृथ्वीराज के सामंत और दिल्ली के तोमर शासक गोविंदराज की मृत्यु हुई।
 
 2. चंदबरदाई के अनुसार युद्ध में पराजय के बाद पृथ्वीराज तृतीय को बंदी बनाकर गजनी ले जाया गया। और वहां शब्दभेदी बाण छोङ कर मुहम्मद गौरी को मार दिया गया।
 
 3. हसम निजामी के अनुसार  युद्ध में हार प्राप्त  होने के बाद पृथ्वीराज ने अधीनता स्वीकार कर ली और गौरी ने उसे अजमेर में अपने अधीन रखकर  शासन करवाया। आगे गौरी के खिलाफ विद्रोह करने की कोशिश की जिसमें पृथ्वीराज मारा गया था (अधिकांश विद्वान इसे ही स्वीकार करते हैं जिसकी पुष्टि अजमेर से प्राप्त सिक्कों से होती है जिसमें एक तरफ घोङे की आकृति तथा मुहम्मद  बिन साम लिखा है। तथा दूसरी तरफ बैल की आकृति बनी है और  पृथ्वीराज लिखा हुआ है।
 
 4. 1192 . के बाद गौरी ने अपने दास ऐबक को भी भारतीय क्षेत्रों का प्रशासक घोषित कर दिया।
 
 5. 1194 . में गौरी ने ऐबक की सहायता से चंदावर जो कि (यू. पी. इटानगर) में है के युद्ध में कन्नौज के शासक जयचंद को भी पराजित कर कन्नौज पर अधिकार कर लिया।
 
 6. 1194 . के बाद गौरी के दो सेनापति जिनका नाम कुतुबुद्दीन ऐबक तथा बख्तियार खिलजी ने भारतीय क्षेत्रों को जीतना शुरू किया।
 
 7. बख्तियार खिलजी ने बिहार और बंगाल का पश्चिमी क्षेत्र सेन शासक लक्ष्मणसेन से जीता और इसी बीच उसने नालंदा (बिहार) विश्व विद्यालय  विक्रमशिला(बंगाल) एवं ओदंतीपुर (बंगाल) विश्व विद्यालय को भी नष्ट कर दिया।
 
 8. बख्तियार खिलजी को असम के माघ शासक ने पराजित किया और  1205 . में बख्तियार खिलजी के ही सैन्य अधिकारी अलिमर्दान ने ही मुहम्मद गौरी की हत्या कर दी।
 
 9. कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1195 . में अन्हिलवाङा के शासक भीम द्वितीय पर भी आक्रमण किया लेकिन ऐबक पराजित हो गया।
 
 10. ऐबक ने 1197 में अन्हिलवाङा पर फिर से आक्रमण किया और इस बार  उसे लूट लिया भीम द्वितीय ने अधीनता स्वीकार नहीं की लेकिन लगातार युद्धों से उसकी आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब हो गई थी। अतः भीम की मृत्यु के बाद गुजरात में सोलंकी वंश के स्थान पर बघेल वंश की स्थापना हो गई।
 
 11. 1203 . में ऐबक ने चंदेल शासक परमर्दिदेव से कालींजर को भी जीत लिया था।
 
मुहम्मद गौरी की मृत्यु : Death of Mohammad Gauri
 
 1. 1206 .में मुहम्मद गौरी ने पंजाब के खोखर जनजाति के विद्रोह को दबाने के लिये भारत पर अंतिम आक्रमण कर दिया था तथा इस अभियान के दौरान दमयक (पश्चिमि पाकिस्तान) के पास गौरी की हत्या कर दी गई  थी गौरी इस समय वह सिंध नदी के किनारे नमाज पढ रहा था।
 
 2. गौरी ने अपनी मृत्यु से पहले ही अपने दासों को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था।
 
 3. गौरी ने माता लक्ष्मी की आकृति वाले कुछ सिक्के चलाये थे।
 
 4. गौरी की मृत्यु के बाद उसका पूरा साम्राज्य उसके तीन प्रमुख दासों में विभाजित हुआ।
 
 5. कुतुबुद्दीन ऐबक ने भारतीय क्षेत्र। ऐबक ने दिल्ली को इस्लामी साम्राज्य का केन्द्र बनाया।
 
 ताजुद्दीन यल्दोज  गजनी क्षेत्र।
 
 नासीरुद्दीन कुबाचा का उच्च तथा सिंध (पाकिस्तान)
 
किसान आंदोलन
 
खेड़ा सत्याग्रह
 
1.   यह आंदोलन 1918 में खेड़ा गुजरात  में शुरू हुआ जब सरकार फसल बर्बाद होने के उपरान्त भी कर वसूल रही थी।
 
2.      ’  इस आंदोलन का नेतृत्व महात्मा गाँधी जी तथा सरदार बल्लभ भाई पटेल ने साथ में किया था।
3.      इस आंदोलन को शांत करने के लिए महात्मा गाँधी जी ने कहा की लगान देने में अक्षम किसानो से वसूली नहीं की जाएगी जबकि लगान देने में सक्षम किसान स्वेक्छा से पूरा लगान देंगे।
 
 उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन 
 
होमरूल लीग के सभी कार्यकताओं के प्रयास तथा मदन मोहन मालवीय के दिशा निर्देशन के उपरान्त परिणामस्वरूप फरवरी सन् 1918 में उत्तर प्रदेश में किसान सभा का गठन किया गया।
 
’  सन् 1919 के अंतिम दिनों में किसानों का संगठित विद्रोह खुलकर सामने गया था
 
इस संगठन को प्रथम प्रधानमंत्री जी जवाहरलाल नेहरूजी ने भी नैतिक समर्थन दिया  
 
उत्तर प्रदेश के हरदोई और बहराइच एवं सीतापुर जिलों में लगान में वृद्धि एवं उपज के रूप में लगान वसूली को लेकर अवध के किसानों ने एका आंदोलन नामक आंदोलन चलाया।
 
 बारदोली सत्याग्रह
 
यह आंदोलन भी लगान में बढ़ोत्तरी के कारण ही आरम्भ हुआ था।
 
यह सूरत गुजरात  के बारदोली में 1928 में आरम्भ हुआ था।
 
इसमें सरदारबल्लभ भाई पटेल एक कुशल एवं सच्चे नेता के रूप में उभरे।
 
इसमें पटेल साहब ने  लगान का बहिष्कार किया तथा लगान देने वाले किसानो का सामाजिक बहिष्कार का भी प्रयोग किया।
 
 तेभागा आन्दोलन 

 
किसान आन्दोलन में सन् 1946 का बंगाल राज्य का तेभागा आन्दोलन सर्वाधिक सशक्त आन्दोलन था
 
’  जिसमें किसानों द्वारा फ्लाइड कमीशन की सिफारिश के अनुरूप लगान की दर घटाकर एक तिहाई करने के लिए संघर्ष शुरू किया था।
 
बंगाल का तेभागा आंदोलन पूरी फसल का दो.तिहाई हिस्सा उत्पीड़ित बटाईदार किसानों को दिलाने के लिए किया गया था।
 
इस आंदोलन के नेता कंपराम सिंह और भवन सिंह साहब  थे।
 
 तेलंगाना आंदोलन 
 
इस समय तेलंगाना जो कि उस समय हैदराबाद रियासत का अंग था। यह 1946 हैदराबाद के निजाम की नीतियों के विरुद्ध कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा आरम्भ किया गया था।
 
यह विद्रोह हिंसात्मक हो गया था और 1951 तक किसी किसी रूप में चलता रहा।
 
 किसान आंदोलनों का महत्व
Importance of the farmer Protest
kisan andolan
 
कई बार किसान आंदोलनों ने राष्ट्रीय आंदोलनों की शून्यता को भरा है।
 
 उदाहरण . 1857 के विद्रोह से 1885 में कांग्रेस पार्टी की स्थापना तक नील विद्रोह पबाना विद्रोह तथा दक्कन विद्रोह हुए।
 
किसान आंदोलनो ने महात्मा गाँधी और सरदार पटेल और राजेंद्र प्रसाद तथा जैसे नेताओ को जन नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित किया।
 
इन्होने स्वतंत्रता उपरान्त कृषि सुधारो के लिए  बहुत ही उपयुक्त वातावरण तैयार किया उदाहरण .स्वतंत्रता उपरान्त ज़मींदारी का विनाश।
 
इन आंदोलनों द्वारा  किसानो तथा अन्य लोगो को उपनिवेशिक शासन के विरुद्ध प्रेरित किया।
 
निष्कर्ष : Conclusion
 
1.      उपनिवेशी शासन के दौरान भी बहुत बार किसानो ने अपनी मांगो के लिए आंदोलन किया है। 
 
2.      परन्तु स्वतंत्रता के बाद भी किसानों के नाम पर होने वाले आंदोलन या उनके आंदोलन हुए वे हिंसक और राजनीति से ज्यादा प्रेरित थे।
 
 

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